शहरी दृश्य Vs गाँव दृश्य खुद कि लाश अपने कंधों पर उठाए हैं ऐ शहर के बाशिंदों हम गांव से आए हैं। अदम गोंडवी टीवी पर ऐड आया वाशिंग पाउडर निरमा सबकी पसंद निरमा गांव की औरतें मन ही मन सोच लिया करती थी, कि अगली बार कपड़े निरमा से ही धोने हैं। मुझे अपना बचपन अच्छे से याद है, वो बचपन कपड़ों के लिहाज से मिट्टी से जुड़ा होता था मतलब मिट्टी और कपड़े की गहरी दोस्ती होती थी। 1991 के बाद शहरी व्यवस्था का वह दौर भी आया जब लोग सपने लेकर शहरों की चका-चौंध में चमकने के लिए शहरों में जाने लगे। वँहा तो सीमेंट उद्योग व कॉंक्रीट के ढांचा में प्रत्यक्ष या यूं कहें एक जीजा और साले का रिश्ता हो गया था। मिट्टी के ढांचे, वन और भाईचारे की सोच शहरी संस्कृति के बीच हांफती नजर आई, या दूसरे शब्दो में हारी हुई अप...